पितृ पक्ष 2025
पितृ पक्ष (Pitru Paksha)
पितृ पक्ष (श्राद्ध पक्ष) भाद्रपद पूर्णिमा के अगले दिन से शुरू होकर आश्विन मास की अमावस्या तक चलता है। यह कुल 16 दिन का होता है।
इन दिनों में पूर्वजों (पितरों) का स्मरण, श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने की परंपरा है। माना जाता है कि इस काल में पितर धरती पर आते हैं और अपने वंशजों द्वारा किए गए तर्पण को स्वीकार करते हैं
🕉️ धार्मिक महत्व
1. ऋण त्रयी – हर मनुष्य को तीन ऋण माने गए हैं –
देव ऋण (देवताओं की पूजा द्वारा मुक्त)
ऋषि ऋण (ज्ञान, धर्म और संस्कार पालन से मुक्त)
पितृ ऋण (श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान से मुक्त)
2. पितरों की शांति के लिए श्राद्ध करना अनिवार्य माना गया है। ऐसा करने से परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।
3. गरुड़ पुराण, महाभारत और मनुस्मृति जैसे ग्रंथों में पितृ पक्ष का विशेष महत्व बताया गया है।
📅 पितृ पक्ष की अवधि
प्रारंभ: भाद्रपद पूर्णिमा के अगले दिन (प्रतिपदा)
समाप्ति: आश्विन अमावस्या (जिसे सर्वपितृ अमावस्या कहा जाता है)
कुल अवधि: 16 दिन
🪔 श्राद्ध और तर्पण की विधि
1. प्रातः स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण करें।
2. एक स्वच्छ स्थान पर कुशा बिछाकर पूर्वजों की पवित्र स्मृति स्थापित करें।
3. तिल, जल और कुशा से तर्पण करें।
4. पिंडदान (आटे, तिल और चावल से बने पिंड) अर्पित करें।
5. ब्राह्मण को भोजन कराएं और दान दें।
6. कौओं (जो पितरों के प्रतीक माने जाते हैं) को भोजन अवश्य दें।
🍛 श्राद्ध में भोजन
सात्विक भोजन ही बनाया जाता है।
बैंगन, मसूर, काला नमक, लौकी, जीरा आदि वर्जित होते हैं।
भोजन प्रायः अरवा चावल, मूंग दाल, कद्दू, पूड़ी, खीर, दूध, घी आदि का होता है।
🚫 पितृ पक्ष में क्या न करें
विवाह, मांगलिक कार्य और नए काम की शुरुआत वर्जित है।
मांसाहार और मद्यपान बिल्कुल निषिद्ध है।
झूठ बोलना, किसी का अपमान करना या क्रोध करना पाप माना गया है।
पितृ पक्ष का अंतिम दिन सर्वपितृ अमावस्या कहलाता है।
इस दिन वे लोग भी श्राद्ध करते हैं जिन्हें अपने पितरों की तिथि ज्ञात नहीं होती।
इस दिन पिंडदान का महत्व सबसे अधिक माना गया है।
पितृ पक्ष पूर्वजों को स्मरण करने, उनका आभार मानने और उनके आशीर्वाद से जीवन को सुखमय बनाने का पर्व है। यह केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं बल्कि पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने की परंपरा है।



